शनिवार, 9 नवंबर 2019

PT JAI GOVIND SHASTRI ASTROLOGER


आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ! पञ्च एतानि विविच्यन्ते जायमानस्य देहिनः !!
अभ्र छाया खले प्रीतिः परनारीषु संगतिः ! पञ्च एतानि ह्यस्थिरा भावा यौवनानि धनानि च !!
अस्थिरं जीवितं लोके अस्थिरं धन यौवनं ! अस्थिरं पुत्र दाराद्यम धर्मः कीर्तिर्यशः स्थिरं !!

अर्थात - जीवात्मा के आयु , कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पांच जन्म से सुनिश्चित रहते हैं ! बादलों की छाया, दुष्ट का प्रेम, परनारी का साथ यौवनं और धन ये पांच अस्थिर हैं ! स्त्री-पुत्र आदि भी अस्थिर है, किन्तु जीवात्मा  का धर्म, कीर्ति और यश चिरस्थायी होता है !!

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