Friday, June 29, 2012


मैंने तो चाँद-सितारों में तुझे देखा है, मैंने हर अश्क की कतारों में तुझे देखा है !
मेरे महबूब तेरे पर्दानसीनी की कसम, मैंने हर रोज़ बहारों में तुझे देखा है !!

Tuesday, June 19, 2012


वृक्षारोपण से सँवारे अपना भाग्य - अपनी सद्गति के लिए पीपल,
शोक और चिंता दूर करने के लिए अशोक,मोक्ष प्राप्ति के लिए वटवृक्ष,
कार्य सिद्धि के लिए आम और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कदम्ब का वृक्ष लगाना
चाहिए !खूबसूरत और उत्तम पति/पत्नी प्राप्ति के लिए पाकड़,
आरोग्य के लिए श्री वृक्ष, अधिक धन के लिए जामुन, स्त्री सुख के लिए
अनार, रोगनाश के लिए शमीवृक्ष और शत्रुओं के पराभव के लिए केशर
का वृक्ष लगाना चाहिए !

Sunday, June 17, 2012


त्वं दूर्वे अमृतनामासि सर्वदेवैस्तु वन्दिता !
वन्दिता दह तत्सर्वं दुरितं यन्मया कृतम !!

मित्रों - समुद्र मंथन के दौरान एक समय जब देव-दानव थकने लगे तो भगवान् विष्णु
ने मंदराचल पर्वत को अपनी जंघा पर रखकर समुद्र मंथन करने लगे उस मंदराचल
पर्वत के घर्षण से जो रोम टूट कर समुद्र में गिरे थे वही जब किनारे लगे तो दूब
के रूप में परिणित होगये ! अमृत निकलने के बाद अमृत कलश को सर्व प्रथम इसी
दूब पर रखागया था जिसके फलस्वरूप यह दूब भी अम्रत तुल्य होकर अमर हो गयी !
यह दूब-घास विष्णु का ही रोम है अतः सभी देवताओं में पूजित हुई और अग्र पूजा के
अधिकारी गणेश को अति प्रिय हुईं तभी से पूजा में दूर्वा का प्रयोग अनिवार्य होगया !
आयुर्वेद में इसे अति बलिष्ट तथा मेधा शक्ति के लिए उत्तम औषधि बताया गया है !!

Saturday, June 16, 2012


ज्ञानी और अज्ञानी में बाहर कोई अंतर नहीं दिखाई देता किन्तु भीतर के
ताल पर बड़ा अंतर हो जाता है !अज्ञानी के कार्य, मन, बुद्धि अहंकार एवं
वासना-तृप्ति के लिए ही होते हैं !वह शरीर पोषण में ही केन्द्रित रहता है !
आत्मज्ञानी संसार की तरह बरसता हुआ भी संसार से भिन्न है !
यह भिन्नता भीतरी बोध की है !!

Sunday, June 10, 2012

कुचैलिनं दंत्मलोपधारिणं बह्वाशिनं निष्ठुरवाक्य धारिणं !
सूर्योदये ह्यस्त मयेपि शायिनं विमुंचति श्रीरपि चक्रपाणिनं !!

अर्थात - जो मलिन वस्त्र धारण करता है, दांतों को स्वच्छ नहीं रखता,
अधिक भोजन करने वाला है, कठोर वचन बोलता है, सूर्योदय और 
सूर्यास्त के समय भी सोता है, अगर वो साक्षात विष्णु हो तो 
 उसे भी लक्ष्मी छोड़ देती हैं आम प्राणियों की गणना ही कहाँ है !!

Thursday, June 7, 2012


मित्रों प्रणाम ! "अब राजनीति में सचिन के सितारे" नामक शीर्षक से आज
ही मेरा आलेख पढ़ें अमर उजाला समाचार पत्र के श्रद्धा पेज पर -

बात बहुत छोटी है अर्थ बहुत गहरा है, सोने की खानों पर चोरों का पहरा है !
कागज़ के फूलों से गंध कहाँ आती है, वक्त कहीं रुकता है ? जल कहाँ ठहरा है !
सारहीन सपने हैं सारहीन मेला है, रोज़ घाव खाए है रोज़ दर्द झेला है
जीवन के अनुभव से एक बात समझी है भीड़भरी दुनिया में आदमी अकेला है

Wednesday, June 6, 2012


अश्वत्थाय  वरेण्याय  सर्व ऐश्वर्य  दायिने !
अनंत  शिव रूपाय  वृक्ष राजाय  ते नमः !!
नेत्रस्पन्दादिजं दुखं दुस्स्वप्नम दुर्विचिन्तनम !
शक्तानां च समुद्योगम अश्वस्थ त्वं क्षमस्व मे !!
मित्रों प्रणाम - अनंत शिव स्वरुप और ऐश्वर्य देने वाले वृक्षों के राजा पीपल
को स्पर्श करते हुए यह मंत्र पढ़ने से नेत्र जन्य दोष, निद्रा की अवधि मे देखे
गए बुरे स्वप्न और अंतर्मन मे चल रहे बुरे विचार दोष हीन हो जाते हैं !!

Saturday, June 2, 2012


प्राणायाम से शारीरिक दोष, धारणा से पूर्व जन्म के अर्जित तथा वर्तमान
तक के सभी पाप, प्रत्याहार से संसर्ग जनित दोष एवं ध्यान से जविक दोष
नष्ट हो जाते हैं ! जैसे आग के ताप रखने से धातुओं के दोष दग्ध हो जाते
हैं उसी प्रक्रार प्राणायाम के द्वारा साधक के इन्द्रियजनित दोष नष्ट हो
जातेहैं ! अतः प्रतिदिन नियम पूर्वक प्राणायाम करके ग्रहदोशों से भी
मुक्ति पाई जा सकती है !!