मंगलवार, 8 सितंबर 2015

बृहस्पति का उदय, महंगाई पर नियंत्रण
देवगुरु बृहस्पति विगत माह 12 अगस्त को दोपहर 11 बजकर 54 मिनट पर अस्त हो गये थे जो आगामी 07 सितंबर सोमवार को दिन
के 03 बजकर 52 पर उदय हो रहे हैं | इनके उदय होने के साथ ही बढ़ रही महंगाई एवं बीमारियों में कमी आएगी, वर्षा के अच्छे आसार बनेंगें, जिससे किसानों को अधिक लाभ होगा किन्तु तेज हवाओं और चक्रवातीय/समुद्रीय तूफानों का खतरा भी बढेगा | गुरु के उदय होने का सर्वाधिक लाभ शेयर बाज़ार पर पड़ेगा जिसके फलस्वरूप हीरे-जवाहरात, सोने-चांदी तथा कमोडिटी सेक्टर्स के निवेशकों को भारी मुनाफा होगा | इन सेक्टर्स में निवेशकों का रुझान बढेगा जिसका प्रभाव देश के विदेशी मुद्राभंडार की वृद्धि के रूप में होगा | डालर के मुकाबले रुपये में भी मजबूती आयेगी | निफ्टी के टॉप 30 कंपनियों के शेयरों में भी भारी सुधार से बाज़ार में खरीदारी का माहौल बनेगा | शीघ्र ही निफ्टी सूचकांक 8000 {आठ हज़ार} का आंकड़ा भी पार कर लेगा | बैंकिंग एवं बीमा सेक्टर्स, आई टी, फार्मा, गैस, टेलिकॉम तथा भारी उद्योग के सेक्टर्स के निवेशकों को और भी जल्दी राहत के आसार बनेंगें | जिन जातकों के बृहस्पति वर्तमान समय में अशुभ गोचर में हैं या, जो इनकी महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर दशासे प्रभावित हैं उनके लिए के गुरु का उदय होना शुभ संकेत है | परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों अथवा प्रतियोगिताओं में बैठने वाले अन्य जातकों के लिए भी यह वरदान की तरह है | किसी भी जातक की जन्मकुंडली में गुरु छठें, आठवें और बारहवें भाव में अशुभ फलदायी होते हैं | जो जातक का गर्ग, गौतम एवं शांडिल्य गोत्र में ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हुए हों, वै यदि मांस-मदिरापान का सेवन कर रहे हों तो, ऐसे जातकों के त्रिकोण लग्न, पंचम एवं नवम् भाव/गोचर में भी से गुरु अशुभ फलदायी होते हैं | वर्तमान में सिंह राशिस्थ गुरु मीन राशि के छठें, मकर राशि के आठवें एवं कन्या राशि के बारहवें भाव में चल रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप इन जातकों को अधिक संयम और सावधानी बरतने की जरुरत है | पं जयगोविन्द शास्त्री 

शुक्रवार, 28 अगस्त 2015

शिवशक्ति का कैलाश प्रस्थान दिवस 'श्रावण पूर्णिमा'
माहपर्यंत भगवान शिव के पृथ्वी पर भ्रमण और उन्हें समर्पित श्रावण माह का कल अंतिम दिन है, पूर्णिमा के दिन जब चन्द्र अपनी सम्पूर्ण कलाओं और सहस्रों शीतल रश्मियों से संसार को आच्छादित कर देते हैं, और माँ महालक्ष्मी पाताल लोक के राजा बलि के यहाँ से बलि को रक्षासूत्र बांधकर विष्णु को मुक्त करा लेती हैं तो भगवान् शिव माँ शक्ति और गणों के साथ कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान करते हैं | इसप्रकार मोक्षदायिक मायाक्षेत्र में श्रावण कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमापर्यंत शिव के निवास की यह अंतिम तिथि रहती है | इसदिन रुद्राभिषेक करना, पंचाक्षर मंत्र का जाप, जप-तप, पूजा-पाठ और दान्पुन्य विशेष महत्व रहता है | वैदिक ब्राह्मणों द्वारा इसदिन 'श्रावणी उपाकर्म' किया जाता हैं इसलिए वैदिक ब्राह्मण गण इसदिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में पवित्र नदी तालाब तीर्थ या देवालय पहुँच कर हेमाद्रिसंकल्प करते हैं | इस आध्यात्मिक विधान में षठकर्म, तीर्थों का आह्वाहन, संकल्प, पंचगव्य स्नान सहित शिखा सिंचन, नवीन यज्ञोपवीत धारण पश्च्यात विष्णु पूजन करना चाहिए | पुनः प्रजापिता ब्रह्मा, चारोंवेद और ऋषियों का पुरुष सूक्त के मंत्रों द्वारा आवाहन/स्तवन करना चाहिए | विधान पूर्ण होने पर आचार्य के हाथों रक्षावंधन बंधवाया जाता है | जिस स्थान पर सामूहिक व्यवस्था हो वहाँ सभी एक दूसरे को रक्षासूत्र बांधे | इसदिन ग्रामीण क्षेत्रों में कुल पुरोहित द्वारा रक्षा सूत्र बांधने का विधान है | सभी सनातनधर्मी ब्राह्मण अपनी वाणी की पवित्रता, सत्याचरण, मन, वचन और कर्म की पवित्रता का संकल्प लेकर यज्ञोपवीत बदलते हैं | पूजनोपरान्त विष्णु-लक्ष्मी के दर्शन से सुख, और समृद्धि की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही इस पूर्णिमा के दिन पर शिवलिंग पर शहद, और पंचामृत का लेप करने से प्राणी कर्ज सेमुक्ति पा लेता है विद्यार्थियों को इसदिन शिवालिंग पर मिश्री और दूध के अमृततुल्य मिश्रण का लेप करते हुए उत्तम विद्या की प्राप्ति हेतु प्रार्थना करना करना चाहिए |अविवाहित अथवा विवाह में विलंब हो रही महिलाओं को गन्ने के रस से अभिषेक करने चाहिए शिव-शक्ति की कृपा से उनके जीवन में उत्तम दाम्पत्य सुख की प्राप्ति होगी |    पं जयगोविन्द शास्त्री

शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

मित्रों आज गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व पर हम सृष्टि के अपने प्रथम गुरु माता/पिता की आजीवन सेवा करते रहने का व्रत लें | आज प्रकाशित मेरा आलेख अमर उजाला समाचार पत्र के श्रद्धा पेज पर....
अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया | 
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ||

मंगलवार, 28 जुलाई 2015

प्रातः स्मरणीय-वन्दनीय माँ भारती के प्रियपुत्र डॉ ऐ.पी.जे अब्दुल कलाम
से मुझे तीन बार मिलने का सौभाग्य मिला | मेरा सौभाग्य है, कि उन्होंने
23 जून 2002 को दैनिक भास्कर में प्रकाशित मेरा यह आलेख "राहु और
केतु का भी कलाम को सलाम" देखा और मुस्कुरा दिये | महान कलाम
को शत-शत नमन..... पं. जयगोविन्द शास्त्री

शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

बृहस्पति का सिंह राशि में प्रवेश बनेगा 'कुंभ' महापर्व योग-
देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्चराशि 'कर्क' की यात्रा समाप्त करके 14 जुलाई की सुबह सिंह राशि में प्रवेश कर रहे हैं, इस राशि पर गुरु लगभग 13 माह रहने के पश्च्यात कन्या राशि में प्रवेश कर जायेंगें | इनके राशि परिवर्तन का प्रभाव भूमंडल पर सभी प्राणियों के कार्य-व्यापार में हानि-लाभ के अतिरिक्त शासन सत्ता और न्यायिक प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है | गुरु ब्रह्म विद्या और ज्ञान के प्रदाता हैं इनके अनंत ज्ञान से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इन्हें देवताओं और ग्रहों का गुरु मनोनीत किया | देवगुरु शादी-विवाह, संतान सुख, शिक्षा-प्रतियोगिता में सफलता, न्यायिक प्रक्रिया, आध्यात्मिक गुरुओं, तीर्थ स्थानों, पवित्र नदियों, धार्मिक साहित्यों, अध्यापकों, ज्योतिषियों, दार्शनिकों, लेखकों, कलाकारों एवं वित्तिय संस्थानों में कार्यरत व्यक्तियों के कारक हैं धनु और मीन राशियों के स्वामी गुरु कर्क राशि पर तथा मकर राशि पर नीच संज्ञक होते हैं जन्मकुंडली में ये दूसरे, पाचवें, नवें और ग्यारहवें भाव के लिए अधिक शुभफल कारक होते हैं | जन्मकुंडली में बलवान गुरू के प्रभाव वाले जातक दयालु, दूसरों की सहायता करने वाले, धार्मिक तथा मानवीय मूल्यों को समझने वाले बुद्धिमान होते हैं, ये कठिन हालात में भी विषयों को आसानी से समझ लेने की क्षमता रखते हैं | ऐसे लोग सृजनात्मक कार्य करने वाले होते हैं जिस कारण समाज में इनका विशेष सम्मान रहता है | इसवर्ष बृहस्पति 12/13 सितंबर को सिंह सूर्य और चंद्र के साथ युति करेंगें, जिसके फलस्वरूप महारष्ट्र के गोदावरी तट पर 'त्र्यम्बक' में अतिदुर्लभ 'कुंभ' महापर्व का योग बनायेंगें | ऐसे सुअवसर पर सभी ग्रह आपसी राग-द्वेष त्याग कर मित्रता पूर्ण व्यवहार करते हुए शुभ फलदाई रहेंगे | सिंह राशि पर बृहस्पति के आगमन का शुभा-शुभ फल अन्य सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते है
मेष - विद्यार्थियों को शिक्षा प्रतियोगिता में सफलता, नव विवाहितों के लिए संतान सुख एवं वरिष्ठों के लिए धार्मिक-मांगलिक कार्य का अवसर |
वृष - मानसिक अशांति किंतु कार्यलाभ, जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटारा होगा, सामाजिक कार्यों पर व्यय किंतु प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी |
मिथुन - भाईयों में असहमति/अविश्वास का माहौल न बनने दें, विदेश यात्रा एवं बुजुर्गों को पौत्र सुख की प्राप्ति, आय के साधन बढेंगें |
कर्क - कार्यों में सफलता प्राप्त होगी, धन लाभ एवं पदोन्नति के अवसर मिलेंगे, तीर्थाटन एवं सामाजिक कार्यों पर धन खर्च होगा |
सिंह - मान सम्मान एवं प्रभाव की वृद्धि, उच्चाधिकारियों से सहयोग मिलेगा, स्वास्थ्य के प्रति सजक रहे, अधिक खर्च से बचे होगा |
कन्या - भाग-दौड की अधिकता से तनाव बढ़ेगा, शादी-विवाह में बज़ट से अधिक व्यय, माकन-वाहन का सुख, मुकदमों में विजय, कर्ज से मुक्ति |
तुला - आय के अनेक साधन बनेंगे, परिवार के बड़ों से सहयोग, संतान संबंधी चिंता से मुक्ति किंतु गुप्त शत्रुओं से सावधान रहे, नौकरी में पदोन्नति |
वृश्चिक - नौकरी में नए अनुबंध, प्रमोशन एवं स्थान परिवर्तन योग, पैत्रिक संपत्ति से लाभ, भौतिक सुख तथा मकान-वाहन के क्रय का योग |
धनु - शिक्षा प्रतियोगिता में चल रही असफलता की समाप्ति, कार्य क्षेत्र में प्रभाव बढ़ेगा, संतान सुख तथा चिंता दूर होगी, यात्रा-देशाटन के योग |
मकर - आपके द्वारा लिए गए निर्णय समाज में सराहनीय होंगे, षड्यंत्र का शिकार होने से बचें, स्वास्थ्य पर ध्यान दें, विवादित मामले आपस में हल करें |
कुंभ - शादी/विवाह एवं व्यापार के क्षेत्र में आ रही रुकावटें दूर होंगी, शिक्षा एवं प्रतियोगिता से लाभ, सामजिक पद-प्रतिष्ठा बढेगी |
मीन - गोचर बृहस्पति का प्रभाव आशांति एवं उलझने देगा, ऋण-रोग और गुप्त शत्रुओं से बचें, कार्य व्यापार में उन्नति | खान-पान पर अधिक ध्यान दें |

अशुभ गुरु को प्रसन्न करने के सरल उपाय-
यदि गोचर बृहस्पति आपकी राशि के लिए अशुभ हैं तो, गरीब एवं ज़रूरत मंद विद्यार्थियों की मदद करें, आम, बरगद, पीपल एवं अनार का वृक्ष लगाएं |महिलाएं कार्य उन्नति एवं उत्तम दामपत्य जीवन के लिए बृहस्पतिवार के व्रत रखें | सभी स्त्री/पुरुष बृहस्पति का गायत्री मंत्र- ॐ अंगिरो जाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि तन्नो गुरूः प्रचोदयात् | का जप प्रतिदिन स्नान के बाद ११ बार जपें | पं जयगोविन्द शास्त्री




शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

मारकेश की दशा आने से पहले बरतें सावधानी
फलित ज्योतिष के अनुसार किसी भी जातक के जीवन में 'मारकेश' ग्रह की दशा के मध्य घटने वाली घटनाओं की सर्वाधिक सटीक एवं सत्य भविष्यवाणी की जा सकती है, क्योंकि मारकेश वह ग्रह होता है जिसका प्रभाव मनुष्य के जीवन में शत-प्रतिशत घटित होता है | यह दशा जीवन में कभी भी आये चाहे जीतनी बार आये, व्यक्ति के जीवन में अपनी घटनाओं से अमिट छाप छोड़ ही जाती हैं | मैंने ऐसे हज़ारों जातकों की जन्मकुंडलिओं का विवेचन किया है, और पाया कि जिन-जिन लोंगों को मारकेश की दशा लगी वै कहीं न कहीं अधिक परेशानी में दिखें | मारकेश अर्थात- मरणतुल्य कष्ट देने वाला वह ग्रह जिसे आपकी जन्मकुंडली में 'मारक' होने का अधिकार प्राप्त है, आपको सन्मार्ग से भटकने से रोकने के लिए सत्य एवं निष्पक्ष कार्य करवाने और न करने पर प्रताड़ित करने का अधिकार प्राप्त है | कुंडली में अलग-अलग लग्न में जन्म लेने वाले जातकों के 'मारक' अधिपति भी अलग-अलग होते हैं ! इनमे मेष लग्न के लिये मारकेश शुक्र, वृषभ लग्न के लिये मंगल, मिथुन लगन वाले जातकों के लिए गुरु, कर्क और सिंह राशि वाले जातकों के लिए शनि मारकेश हैं, कन्या लग्न के लिए गुरु, तुला के लिए मंगल, और बृश्चिक लग्न के लिए शुक्र मारकेश होते हैं, जबकि धनु लग्न के लिए बुध, मकर के लिए चंद्र, कुंभ के लिए सूर्य, और मीन लग्न के लिए बुध मारकेश नियुक्त किये गये हैं | सूर्य जगत की आत्मा तथा चंद्रमा अमृत और मन हैं इसलिए इन्हें मारकेश होने का दोष लगता इसलिए ये दोनों अपनी दशा-अंतर्दशा में अशुभता में कमी लाते हैं | मारकेश का विचार करते समय कुण्डली के सातवें भाव के अतिरिक्त, दूसरे, आठवें, और बारहवें भाव के स्वामियों और उनकी शुभता-अशुभता का भी विचार करना आवश्यक रहता है, सातवें भाव से आठवाँ द्वितीय भाव होता है जो धन-कुटुंब का भी होता है इसलिए सूक्ष्म विवेचन करके ही फलादेश कहना चाहिए | मारकेश की दशा जातक को अनेक प्रकार की बीमारी, मानसिक परेशानी, वाहन दुर्घटना, दिल का दौरा, नई बीमारी का जन्म लेना, व्यापार में हानि, मित्रों और सम्बन्धियों से धोखा तथा अपयश जैसी परेशानियाँ आती हैं | इसके के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए सरल और आसान तरीका है, कि कुंडली के सप्तम भाव में यदि पुरुष राशि हो तो शिव की तथा स्त्री हों तो शक्ति की आराधना करें | सम्बंधित ग्रह का चौगुना मंत्र, महामृत्युंजय जाप, एवं रुद्राभिषेक करना इस दशा शांति के सरल उपाय हैं ! इसके अतिरिक्त जो भी ग्रह मारकेश हो उसी का 'कवच' पाठ करें, ध्यान रहे दशा आने से एक माह पहले ही आचरण में सुधार लायें और अपनी सुबिधा अनुसार स्वयं उपाय करें | पं जयगोविंद शास्त्री

मंगलवार, 23 जून 2015

'दुःख-दारिद्र्य से मुक्ति दिलाने आता है, मलमास'
17 जून से आरम्भ हो चुका मलमास अगले महीने की 16 जुलाई तक रहेगा | मुहूर्त ग्रंथों के अनुसार जिस चांद्रमास में सूर्य संक्रांति नहीं पड़ती उसे ही मलमास
या पुरुषोत्तम कहा गया है, जो 28 से 36 माह के मध्य एक बार आता है ! सिद्धांत ग्रंथो के अनुसार सूर्य का बारह राशियों पर भ्रमण में जितना समय लगता
है उसे सौर वर्ष कहा गया है, जिसकी अवधि 365 दिन 6 घंटे और 11 सेकेण्ड की होती है, इन्हीं बारह राशियों का भ्रमण चंद्रमा प्रत्येक माह करते हैं जिसे चांद्र
मास कहा गया है | चंद्रमा एक वर्ष में 12 बार सभी राशियों पर भ्रमण करते हैं जिसे चांद्र वर्ष कहा जाता है | चंद्रमा का यह वर्ष 354 दिन और लगभग 09 घंटे
का होता है ! परिणाम स्वरुप सूर्य और चन्द्र के भ्रमण काल में एक वर्ष में 10 दिनों का अंतर आ जाता है इस प्रकार सूर्य और चन्द्र के वर्ष का समीकरण ठीक
करने के लिए अधिक मास का जन्म हुआ ! ये बचे हुए दिन लगभग तीन वर्ष में 31 दिन से भी अधिक होकर अधिमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में
जाने जाते हैं ! पौराणिक कथा है कि आदिकाल काल में जब सूर्य एवं चंद्र की यात्रा के मध्य वर्ष में 10 दिनों का अंतर पडने लगा तो उसे विशुद्ध करने एवं वैदिक
गणितीय प्रक्रिया को ठीक करने के लिए अधिक मास का जन्म हुआ | स्वामी रहित होने के कारण मलमास की सर्वत्र निंदा होने लगी | अपनी निंदा एवं उपहास से
दुखी होकर वह सर्वेश्वर श्रीकृष्ण के पास गये और लोंगों द्वारा उपहास-तिरस्कार किये जाने की अपनी व्यथा बताई मलमास की करूँ व्यथा से द्रवित होकर परमेश्वर
श्री कृष्ण ने कहा कि मलमास तुम दुखी न हो आज से मै ही तुम्हारा स्वामी हूँ इसलिए आज से तुम 'पुरुषोत्तम मास' के नाम से जाने जाओगे | तुम्हारे माह के
मध्य किये गये सभी कार्य केवल मेरे ही निमित्त होंगें | अतः किसी भी तरह की कामना पूर्ति के लिए अनुष्ठान का आयोजन, विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत, नींव-पूजन,
गृह-प्रवेश आदि सांसारिक कार्य सर्वथा वर्जित रहेंगें | जो प्राणी इस मास में मेरा भजन-पूजन करेगा अथवा मेरी अमृतमयी श्रीमद्भागवत् महापुराण की कथा सुनेगा
उसे मेरा उत्तमलोक प्राप्त होगा मेरे सहस्त्र नाम, पुरुष सूक्त का पाठ, वेद मंत्रों का श्रवण, गौ दान, पौराणिक ग्रंथो का दान, वस्त्र, अन्न और गुड़ का दान करना
उत्तम फलदायी रहेगा !साधक को चाहिए कि इस मास के मध्य तामसिक भोजन और मांस मदिरा से परहेज करें ! केवल मेरी कथा ही सभी कष्टों से मुक्ति
दिलाने के लिए पर्याप्त रहेगी, तभी से मलमास को पुरुषोत्तम मास के रूप में भी जाना जाता है ! पं. जयगोविन्द शास्त्री