गुरुवार, 19 जुलाई 2012

मित्रों प्रणाम ! एकादशी में चावल खाने से परहेज क्यों ..?

सोमवार, 9 जुलाई 2012

            श्रावण में बोलें बम-बम भोले-- 

शनिवार, 30 जून 2012


मैंने तो चाँद-सितारों में तुझे देखा है, मैंने हर अश्क की कतारों में तुझे देखा है !
मेरे महबूब तेरे पर्दानसीनी की कसम, मैंने हर रोज़ बहारों में तुझे देखा है !!

बुधवार, 20 जून 2012


वृक्षारोपण से सँवारे अपना भाग्य - अपनी सद्गति के लिए पीपल,
शोक और चिंता दूर करने के लिए अशोक,मोक्ष प्राप्ति के लिए वटवृक्ष,
कार्य सिद्धि के लिए आम और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए कदम्ब का वृक्ष लगाना
चाहिए !खूबसूरत और उत्तम पति/पत्नी प्राप्ति के लिए पाकड़,
आरोग्य के लिए श्री वृक्ष, अधिक धन के लिए जामुन, स्त्री सुख के लिए
अनार, रोगनाश के लिए शमीवृक्ष और शत्रुओं के पराभव के लिए केशर
का वृक्ष लगाना चाहिए !

सोमवार, 18 जून 2012


त्वं दूर्वे अमृतनामासि सर्वदेवैस्तु वन्दिता !
वन्दिता दह तत्सर्वं दुरितं यन्मया कृतम !!

मित्रों - समुद्र मंथन के दौरान एक समय जब देव-दानव थकने लगे तो भगवान् विष्णु
ने मंदराचल पर्वत को अपनी जंघा पर रखकर समुद्र मंथन करने लगे उस मंदराचल
पर्वत के घर्षण से जो रोम टूट कर समुद्र में गिरे थे वही जब किनारे लगे तो दूब
के रूप में परिणित होगये ! अमृत निकलने के बाद अमृत कलश को सर्व प्रथम इसी
दूब पर रखागया था जिसके फलस्वरूप यह दूब भी अम्रत तुल्य होकर अमर हो गयी !
यह दूब-घास विष्णु का ही रोम है अतः सभी देवताओं में पूजित हुई और अग्र पूजा के
अधिकारी गणेश को अति प्रिय हुईं तभी से पूजा में दूर्वा का प्रयोग अनिवार्य होगया !
आयुर्वेद में इसे अति बलिष्ट तथा मेधा शक्ति के लिए उत्तम औषधि बताया गया है !!

रविवार, 17 जून 2012


ज्ञानी और अज्ञानी में बाहर कोई अंतर नहीं दिखाई देता किन्तु भीतर के
ताल पर बड़ा अंतर हो जाता है !अज्ञानी के कार्य, मन, बुद्धि अहंकार एवं
वासना-तृप्ति के लिए ही होते हैं !वह शरीर पोषण में ही केन्द्रित रहता है !
आत्मज्ञानी संसार की तरह बरसता हुआ भी संसार से भिन्न है !
यह भिन्नता भीतरी बोध की है !!