Friday, November 8, 2019

शनि के राशि परिवर्तन से किन राशियों को साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगा छुटकारा- पं जयगोविंद शास्त्री 
15 नवंबर 2011 (2हजार 9सौ 90दिन) शनि के तुला राशि में प्रवेश के साथ ही वृश्चिक राशि की साढ़ेसाती 24 जनवरी की रात्रि को शनिदेव के मकर राशि 
में प्रवेश के साथ ही समाप्त हो रही है | सामान्यतः मार्गी और वक्री की यात्रा करते हुए शनिदेव एक राशि में 2700 दिन तक विचरण करते हैं किन्तु कई बार 
यह अवधि वक्री-मार्गी होते होते इसे भी पार कर जाती है | जैसे तुला राशि में शनि के प्रवेश के साथ ही बृश्चिक राशि पर शाढ़ेसाती आरंभ हुई थी जो अब 
2हजार 9सौ 90दिन बाद समाप्त हो रही है | 
किसी भी राशि पर जिसपर शनिदेव की शाढ़े साती आरंभ होने वाली हो उस राशि के किस अंग पर इनका विचरण होता है यदि आप इसे समझ कर उसकी 
के अनुसार निर्णय एवं उपाय करें तो शाढ़े साती एवं ढैया में इनके अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है | जैसे शाढ़े साती के आरंभ होते ही इनका प्रथम प्रभाव 
100 दिनों तक मनुष्य के मुख पर रहता है | जो बेहद कष्ट कारक होता है शनि के आरंभ का यह समय इतना पीड़ा देने वाला होता है कि व्यक्ति शनिदेव की 
साढ़ेसाती के नाम से घबराता है |
उसके पश्चात 400 दिनोंतक शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव प्राणियों के दाहिनी भुजा पर रहता है, जो सर्वथा विजयश्री दिलाता है | भारत के अधिकतर बड़े बड़े 
नेता साढ़ेसाती की इसी अवधि में सर्वोच्च शिखर तक पहुंचे हैं | इस अवधि के मध्य किए गए सभी संकल्प-कार्य पूर्णतया सफल रहते हैं |
उसके पश्चात 600 दिनों तक साढ़ेसाती का प्रभाव मनुष्य के चरणों में रहता है, जिसके फलस्वरूप व्यक्ति देश-विदेश की यात्राएं ततः तीर्थ यात्राएं करता है |
समाज में प्रतिष्ठित लोगों से मेलजोल बढ़ता है और व्यापार एवं नौकरी आदि में अच्छी उन्नति तथा मकान-वाहन के सुख भोगता है |
तदुपरांत 500 दिनों तक शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव मनुष्य के पेट पर रहता है, जो हर प्रकार से लाभदायक सिद्ध होता है स्वास्थ्य अच्छा रहता है और अनेकों
स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद मिलता है | साढ़ेसाती का यह समय व्यक्ति के कामयाबियों के लिए अति शुभ फलदाई रहता है |
पुनः 400 दिनों तक साढ़ेसाती का प्रभाव प्राणियों के बाईं भुजा पर रहता है, जो बेहद कष्टकारक रहता है साढेसाती की इस अवधि में व्यक्ति यह निर्णय लेने में 
विवश दिखाई देता है कि उसे करना क्या है. निर्णय लेने में कठिनाइयां तो होती ही हैं कहीं न कहीं वह निराशा और परेशान हो जाता है |
उसके बाद 300 दिनोंतक शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव व्यक्ति के मस्तक पर रहता है, जिसके फलस्वरूप प्राणियों के कार्य व्यापार में उन्नति सामाजिक प्रतिष्ठा 
एवं पद और गरिमा की वृद्धि होती है | इस अवधि में व्यक्ति जहां भी जाता है उसे कामयाबी और ही यश प्राप्त होता है | 
उसके उपरांत 200दिन तक शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव मनुष्य के नेत्रों पर रहता है, जिस के शुभ प्रभाव के फलस्वरूप वह तीर्थ यात्रा, यज्ञ, जप-तप, पूजा-पाठ, 
दान पुण्य आदि सभी तरह के अच्छे कर्म करता है उसे घर परिवार में मांगलिक कार्यों से सुख मिलता है |
उसके उपरांत 200 दिन तक शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण होता है, जब साढ़ेसाती उतरती है | इस अवधि में शनि की साढ़ेसाती जीवात्माओं के गुदा स्थान 
पर रहती है जिसके फलस्वरूप उसे अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है | साढ़ेसाती का यह कालखंड इस तरह से रहता है कि इस के मध्य आई परेशानियों
को व्यक्ति जीवनपर्यंत याद रखता है | 
वर्तमान समय में साढ़ेसाती का अंतिम 200 दिन की शाढ़े साती का कालखंड वृश्चिक राशि पर चल रहा है, अतः वृश्चिक राशि वालों को अपने स्वास्थ्य पर ध्यान 
रखना चाहिए | मान सम्मान के प्रति सजग रहना चाहिए और कोर्ट कचहरी के मामलों से परहेज करना चाहिए | 
अपने गोचर काल में जब शनिदेव किसी भी राशि पर गोचर करते हैं तो अपने पीछे की चौथी और आठवीं राशि पर अपनी ढैया का भी प्रभाव छोड़ते हैं इस कालखंड 
का फल प्राणियों के कर्मों के अनुसार ही मिलता है | यदि आपके कर्म अच्छे रहे तो आप मालामाल हो जायेगें इसीलिए इसे लघु कल्याणी ढैया भी कहते हैं | 
किन्तु अशुभ एवं पाप कर्मों में लिप्त रहने पर यह अवधि और भी कष्टकारी रहती है | इसमें व्यक्ति को अत्यधिक उतार-चढ़ाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां और कार्य 
बाधाओं का सामना करना पड़ता है | उस अवधि के मध्य यदि शनि पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही हो तो इनकी ढैया की अशुभता में कमी आती है | 
वर्तमान समय में वृषभ एवं कन्या राशि के जातकों को शनि देव की अशुभ ढैया लोहे के पाए पर चल रही है | जिससे 24 जनवरी की रात्रि को शनिदेव के मकर राशि 
में प्रवेश के साथ ही ढैया से मुक्ति मिल जाएगी | 

PT JAI GOVIND SHASTRI ASTROLOGER


आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ! पञ्च एतानि विविच्यन्ते जायमानस्य देहिनः !!
अभ्र छाया खले प्रीतिः परनारीषु संगतिः ! पञ्च एतानि ह्यस्थिरा भावा यौवनानि धनानि च !!
अस्थिरं जीवितं लोके अस्थिरं धन यौवनं ! अस्थिरं पुत्र दाराद्यम धर्मः कीर्तिर्यशः स्थिरं !!

अर्थात - जीवात्मा के आयु , कर्म, धन, विद्या और मृत्यु ये पांच जन्म से सुनिश्चित रहते हैं ! बादलों की छाया, दुष्ट का प्रेम, परनारी का साथ यौवनं और धन ये पांच अस्थिर हैं ! स्त्री-पुत्र आदि भी अस्थिर है, किन्तु जीवात्मा  का धर्म, कीर्ति और यश चिरस्थायी होता है !!
!! उत्तम संतान की प्राप्ति हेतु करें नाग पूजा !! 'नाग पंचमी ११ अगस्त '
नाग हमारे शरीर में मूलाधार चक्र के आकार में स्थित हैं एवं उनका फन सहस्रासार चक्र है ! पुराणों में नागोत्पत्ति
के कई वर्णन मिलते हैं ! लिंग पुराण के अनुसार श्रृष्टि सृजन हेतु प्रयासरत ब्रह्मा जी उग्र तपस्या करते हुए हताश
होने लगे तो क्रोधवश उनके कुछ अश्रु पृथ्वी पर गिरे वहीँ पर अश्रुबिंदु सर्प के रूप में उत्पन्न हुए ! बाद में यह ध्यान
में रखकर कि इन सर्पों के साथ कोई अन्याय न हो तिथियों का बंटवारा करते समय भगवान सूर्य ने इन्हें पंचमी तिथि
का अधिकारी बनाया तभी से पंचमी तिथि नागों की पूजा के लिए विदित है इसके बाद ब्रह्मा जी ने अष्टनागों अनन्त,
वासुकि, तक्षक, कर्कोटक,पद्म, महापद्म, कुलिक, और शंखपाल की सृष्टि की, और इन नागों को भी ग्रहों के बराबर
शक्तिशाली बनाया ! इनमें अनन्त नाग सूर्य के, वासुकि चंद्रमा के, तक्षक भौम के, कर्कोटक बुध के, पद्म बृहस्पति के,
महापद्म शुक्र के, कुलिक और शंखपाल शनि ग्रह के रूप हैं ! ये सभी नाग भी सृष्टि संचालन में ग्रहों के समान ही
भूमिका निभाते हैं ! इनके सम्मान हेतु गणेश और इन्हें रूद्र यज्ञोपवीत के रूप में, महादेव श्रृंगार के रूप में तथा विष्णु
जी शैय्या रूप में सेवा में लेते हैं ! पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शेषनाग स्वयं पृथ्वी को अपने फन पर धारण करते हैं !
गृह निर्माण, पितृ दोष और कुल की उन्नति के लिए नाग पूजा का और भी अधिक महत्व है ! इनकी पूजा
आराधना से सर्पदंश का भय नहीं रहता ! नाग पंचमी के दिन नाग पूजन और दुग्ध पान करवाने का विशेष महत्व है !
पूजा में ''ॐ सर्पेभ्यो नमः" अथवा ॐ कुरु कुल्ले फट स्वाहा ! कहते हुए अपनी शक्ति-सामर्थ्य के अनुसार गंध, अक्षत,
पुष्प, घी, खीर, दूध, पंचामृत, धुप दीप नैवेद्य आदि से पूजन करना चाहिए ! पूजन के पश्च्यात इस मंत्र से प्रणाम करें 
!! नमोऽस्तु सर्पेभ्यो ये के च पृथ्वी मनु, ये अन्तरिक्षे ये दिवि तेभ्यः सर्पेभ्यो नमः !!
जो नाग, पृथ्वी, आकाश, स्वर्ण, सूर्य की किरणों, सरोवरों, कूप तथा तालाब आदि में निवास करते हैं।
वे सब हम पर प्रसन्न हों, हम उनको बार-बार नमस्कार करते हैं इसप्रकार नागपंचमी के दिन सर्पों की पूजा करके
प्राणी सर्प एवं विष के भय से मुक्त हो सकता है पं. जयगोविंद शास्त्री

हाल ही में महाकाल ज्योतिर्लिंग उज्जैन ( म.प्र ) में शिवसंकल्पमस्तु संस्था
द्वारा आयोजित 'महारुद्र यज्ञ' को मीडिया ने प्रमुखता से प्रकाशित किया !
अहिंसकस्य दान्तस्य धर्मार्जित धनस्य च ! नित्यं च नियमस्थस्य सदा सानु ग्रहा ग्रहाः !!
ग्रहाः पूज्या सदा रूद्र इच्छता विपुलं यशः !श्रीकामः शांतिकामो वा ग्रहयज्ञं समाचरेत !!

..... अहिंसक, जितेन्द्रिय, नियम में स्थित और न्याय से धन अर्जित करने वाले मनुष्यों पर सदा ग्रहों की कृपा बरसती रहती है ! यश ,धन, आरोग्य,उत्तम पद और संतानप्राप्ति तथा सभी तरह की परेशानियों से बचने के लिए ग्रहों की पूजा सदा करनी चाहिए ! क्यों कि ! ग्रहाः राज्यं प्रयच्छन्ति, ग्रहाः राज्यं हरन्ति च ! अर्थात -ग्रह अनुकूल हों तो राज्य दे देतें हैं,और प्रतिकूल होने पर तत्काल हरण भी कर लेते हैं !!
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=200833876661411&set=a.101281796616620.1577.100002043995093&type=1&ref=nf

या निशा सर्व भूतानां तस्यां जागर्ति संयमी ! यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुने !!
अर्थात- ज्ञानी तत्वदर्शन में जागता है जिसमे सारे प्राणी सोते हैं, और सारे प्राणी जिस माया में जागते हैं
तत्व ज्ञानी के लिए वही रात है वह उसमे सोता है ! माया अनादि है, परन्तु शांत है क्योंकि तत्वज्ञान होने पर
इसका अंत हो जाता है ! किन्तु जब माया अनादि है तो इससे पार कैसे पाया जासकता है ? इसपर कृष्ण कहते है की यह त्रिगुणमयी मेरी देवी माया है इसका पार पाना कठिन है किन्तु जो मुझमे अनुराग रखता है वह इस माया
से पार पा सकता है ! "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
PT.JAIGOVIND SHASTRI ASTROLOGER HAS WIRTTEN AN ARTICAL ABOUT "दीप  प्रज्वलन की महत्ता"


 !! और भी पुन्यफलदाई होता है पितृ विसर्जन के दिन श्राद्ध-तर्पण  !! पं. जयगोविन्द शास्त्री 
पितृपक्ष का पावन पर्व धीरे-धीरे समापन की ओर बढ़ रहा है ! परिवार के किसी भी मृत व्यक्ति/संबंधी की तिथि न 
मालूम हो तो पितृ विसर्जन के दिन ही श्राद्ध करें ! यह तिथि सभी के लिए ग्राह्य मानी गई है अगर सम्बंधित 
परिजन की मृत्यु की तिथि ज्ञात हो तो उस मृत्यु तिथि में ही उनका श्राद्ध करने का विधान है ! 
पितृ विसर्जन की तिथि का इतना अधिक महत्व क्यों ?
इसतिथि के 'सर्वपितृ श्राद्ध' होने के पीछे एक महत्वपूर्ण घटना है कि, देवताओं के पितृगण 'अग्निष्वात्त' जो 
सोमपथ लोक मे निवास करते हैं ! उनकी मानसी कन्या, 'अच्छोदा' नाम की एक नदी के
रूप में अवस्थित हुई ! एकबार अच्छोदा ने एक हज़ार वर्षतक निर्बाध तपस्या की ! उनकी तपस्या से प्रसन्न 
होकर दिव्यशक्ति परायण देवताओं के पितृगण 'अग्निष्वात्त' अच्छोदा को वरदान देने के लिए दिव्य सुदर्शन शरीर 
धारण कर आश्विन अमावस्या के दिन उपस्थित हुए ! उन पितृगणों में 'अमावसु' नाम के एक अत्यंत सुंदर पितर की 
मनोहारी-छवि यौवन और तेज देखकर अच्छोदा कामातुर हो गयीं और उनसे प्रणय निवेदन करने लगीं किन्तु अमावसु 
अच्छोदा की कामप्रार्थना को ठुकराकर अनिच्छा प्रकट की ! इससे अच्छोदा अति लज्जित हुई 
और स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गिरीं ! उसी पाप के प्रायश्चित हेतु कालान्तर में यही अच्छोदा महर्षि पराशर की 
पत्नी एवं वेदव्यास की माता बनी थी !तत्पश्यात समुद्र के अंशभूत शांतनु की पत्नी हुईं और दो पुत्र चित्रांगद तथा 
विचित्रवीर्य को जन्म दिया था ! इन्ही के नाम से कलयुग में इन्ही के नाम से 'अष्टका श्राद्ध' मनाया जाता है !
अमावसु के ब्रह्मचर्य और धैर्य की सभी पितरों ने सराहना की एवं वरदान दिया कि, यह अमावस्या की तिथि 
'अमावसु' के नाम से जानी जाएगी ! जो प्राणी किसी भी दिन श्राद्ध न करपाए वह केवल अमावस्या के दिन श्राद्ध-तर्पण 
करके सभी बीते चौदह दिनों का पुन्य प्राप्त करते हुए अपने पितरों को तृप्त कर सकतें हैं, 
तभी से यह तिथि 'सर्वपितृ श्राद्ध' के रूप में मानाई जाती है ! धन के अभाव में कैसे करें श्राद्ध ? 
वेद के अनुसार मृत पिता को वसुगण, दादा को रूद्रगण और परदादा को आदित्यगण कहागया है हमारे द्वारा किये 
श्राद्ध ये देव अग्नि, चन्द्र और यम के सहयोग से सम्बंधित लोकों में पहुचा देते हैं ! यदि धन-वस्त्रादि खरीदने के लिए
 रुपये न हों तो निराश होने जैसी कोईबात नहीं है - तस्मात्श्राद्धम नरो भक्त्या शाकैरपि यथाबिधिः ! 
अर्थात केवल श्रद्धा सहित शाक ही अर्पित करें और निवेदन करें की हे ! पितृ आप हमें सामर्थ्य वान बनाएँ ताकि 
भविष्य में और अच्छे ढंग से श्राद्ध-तर्पण कर सकूं ! ऐसा कहने से आप को लाखों गुना फल प्राप्त होगा ! 
गौ माता तो खिलाएं घास - पद्मपुराण के अनुसार सृष्टि सृजन के क्रम में ब्रह्मा जी ने सबसे पहले गौ कि रचना की, 
गौ माता में सभी तैतीस करोंड़ देवी-देवाताओं का वास है अतः 'कुतप काल; यानी दिन के ग्यारह बजकर छत्तीस 
मिनट से बारह बजकर चौबीस मिनट के मध्य गौओं का पंचोपचार बिधि से पूजन करके 
 उन्हें हरी घास (दूब) ही श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध के निमित्त खिलादें तब भी श्राद्ध-तर्पण का पूर्णफल प्राप्त हो जायेगा !
ब्राह्मणों के अभाव में किसे कराएं भोजन ?आज-कल श्राद्ध के दिनों में भोजन कराने हेतु ब्राह्मणों का अकाल पडता 
जा रहा है अधिकतर ब्राह्मण भी अब श्राद्ध का भोजन करने से परहेज करने करने लगे हैं ऐसे में कन्या के पुत्र को
 भोजन कराएँ यदि यह भी संभव न हो तो बैगैर पकाया हुआ अन्न मंदिर में दान करें इसके अतिरिक्त गौ
माता की पूजा-प्रदक्षिणा करके उन्ही को अपने हाथों से भोजन खिलायें तो भी अन्न का भाग सभी लोकों-पितृलोकों 
में पहुँच जायेगा ! 
श्राद्ध करने न करने से लाभ हानि - श्राद्ध करने का लौकिक अर्थ है अपने पूर्वजों और बड़ों के प्रति सम्मान 
प्रकट करना, समर्पण भाव रखना ! इसलिए श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने पर पितृ हमें -
''आयु पुत्रान यशः स्वर्गं कीर्तिं पुष्टिं बलं श्रियम ! पशून सौख्यं धनं-धान्यं प्राप्नुयात पितृ पूजनात'' 
अर्थात आयु, पुत्र, ख्याति, स्वर्ग, बल-बुद्धि, पशु भौतिक सुखों के साथ-साथ सभी ऐश्वर्य वरदान रूप में प्रदान करते हैं ! 
श्राद्ध न करने पर -श्राद्धं न कुरुते मोहात् तस्य रक्तं पिबन्ति ते ! जैसे शरीर अधिक दिनों तक भूखा रहने पर स्वयं की
 चर्बी को ही खाने लगता है उसी प्रकार पितृ भी इस पक्ष में श्राद्ध-तर्पण न पाने से अपने ही सगे सम्बन्धियों का खून
 पीने लगते हैं तथा अमावस्या के दिन श्राप देकर अपने-अपने लोक चले जाते है अतः श्राद्ध की अनेकों बिधाओं
 में से किसी भी विधा के अनुसार अपने पूर्वजो का सम्मान करें !     '''शिवसंकल्पमस्तु'''


 "शरद पूर्णिमा पर पायें ऋण-रोग और दारिद्र्य से मुक्ति "
शरद पूर्णिमा का पावन पर्व आज है ! अगस्त तारे के उदय और चंद्रमा की सोलह कलाओं  की शीतलता का संयोग
देखने लायक होगा ! यह पूर्णिमा सभी बारह पूर्णिमाओं में सर्वश्रेष्ट मानी गयी गई है ! आज के दिन भगवान् कृष्ण
महारास रचाना आरम्भ करते हैं ! देवीभागवत महापुराण में कहा गया है कि, गोपिकाओं के अनुराग को देखते हुए
भगवान् कृष्ण ने चन्द्र से महारास का संकेत दिया, चन्द्र ने भगवान् कृष्ण का संकेत समझते ही अपनी शीतल रश्मियों
से प्रकृति को आच्छादित कर दिया ! उन्ही किरणों ने भगवान् कृष्ण के चहरे पर सुंदर रोली कि तरह लालिमा भर दी !
फिर उनके अनन्य जन्मों के प्यासे बड़े बड़े योगी, मुनि, महर्षि और अन्य  भक्त गोपिकाओं के रूप में कृष्ण लीला रूपी
महारास ने समाहित  हो गए, कृष्ण कि वंशी कि धुन सुनकर अपने अपने कर्मो में लीन सभी गोपियाँ अपना घर-बार
छोड़कर  भागती हुईं  वहाँ आ पहुचीं ! कृष्ण और  गोपिकाओं का अद्भुत प्रेम देख कर चन्द्र ने अपनी सोममय किरणों से
अमृत वर्षा आरम्भ कर दी जिसमे भीगकर यही गोपिकाएं अमरता को प्राप्त हुईं, और भगवान् कृष्ण के अमर  प्रेम का
भागीदार बनी चंद्रमा की सोममय रश्मियां जब पेड़ पौधों और वनस्पतियों पर पड़ी तो उनमें भी अमृत्व का संचार हो गया !
इसीलिए इसदिन खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे मध्यरात्रि में रखने का विधान है रात्रि में चन्द्र की किरणों से जो
अमृत वर्षा होती है, उसके फलस्वरुप वह खीर भी अमृत समान हो जाती है उसमें चन्द्रमाँ से जनित दोष शांति और आरोग्य
प्रदान करने की क्षमता स्वतः आ जाती है ! यह प्रसाद ग्रहण करने से प्राणी मानसिक क्लान्ति से मुक्ति पा लेता है !
            ! कर्ज से मुक्ति माने का दिन !
प्रलय के चार प्रमुख देवता रूद्र, वरुण, यम और निर्रृति का तांडव जब आषाढ़ शुक्ल एकादशी विष्णु शयन के दिन से
आरम्भ होता है, तो माता लक्ष्मी भी विष्णु सेवा में चली जाती हैं ! जिसके परिणाम स्वरुप देवप्राण शक्तियाँ भी
कमजोर होती जाती है और आसुरी शक्तियों का वर्चस्व बढ़ जाता है ! इस अवधि में वरुणदेव  बाढ़ , सुखा,
भूस्खलन, रूद्र नानाप्रक्रार के ज्वर यक्ष्मा आदि  रोग, यम अकाल मृत्यु  और अलक्ष्मी देवी जिन्हें आप निर्र्ति के
नाम से जानते हैं, वै पृथ्वीवासिओं को नाना प्रक्रार के दुःख-दारिद्र्य और  हानि पहुचाती हैं ! इस काल कि मुख्य अवधि
भादों पूर्णिमा तक होती है महालय के बाद नवरात्रिमें शक्ति आराधना के मध्य जब देवप्राण की शक्ति बढ़ने लगती है
तब आसुरी शक्तियां कमजोर पड़ने लगती हैं ! विजयदशमी के दिन व्रत पारणा के पश्च्यात भगवान् विष्णु की परमप्रिय
एकादशी को सबके पूजा आराधना के फल, कर्मों के आधार पर दिया जाता है ! जिससे पापकर्मो पर अंकुश लगजाता है
इसीलिए इसे पापांकुशा एकादशी भी कहते हैं ! पाप पर अंकुश लगने के बाद पूर्णिमा को माता महालक्ष्मी का पृथ्वी पर
आगमन होता है ! वै घर-घर जाकर सबको वरदान देती हैं किन्तु जो लोग दरवाजा बंद करके सो रहे होते हैं वहाँ से
लक्ष्मी जी दरवाजे से ही वापस चली जाती है ! तभी शास्त्रों में  इस पूर्णिमा को  कोजागरव्रत, यानी कौन जाग रहा है
व्रत भी कहते हैं ! इसदिन की लक्ष्मी पूजा सभी कर्जों से मुक्ति दिलाती हैं ! अतः शरदपूर्णिमा को कर्ज मुक्ति पूर्णिमा
भी इसीलिए कहते हैं ! इसरात्रि को ''श्रीसूक्त'' का पाठ, ''कनकधारा स्तोत्र'' ''विष्णु सहस्त्र'' नाम का जाप और भगवान् कृष्ण
का 'मधुराष्टकं' का पाठ ईष्टकार्यों की सिद्धि दिलाता है और उस भक्त को भगवान् कृष्ण का सानिध्य मिलता है !
जन्म कुंडली में चंद्रमा क्षीण हों, महादशा-अंतर्दशा या प्रत्यंतर्दशा चल रही हो या चंद्रमा छठवें, आठवें या बारहवें भाव
में हो तो चन्द्र की पूजा और मोती अथवा स्फटिक माला से ॐ सों सोमाय नमः मंत्र का जप करके चंद्रजनित दोषों से
मुक्ति पाई जा सकती है ! जिन्हें लो ब्ल्ड प्रेशर हो, पेट या ह्रदय सम्बंधित बीमारी हो, कफ़ नजला-जुखाम हो आखों से
सम्बंधित बीमारी हो वै आज के दिन चन्द्रमा की आराधान करके इस सबसे मुक्ति पासकते हैं ! जिन विद्यार्थियों
का मन पढ़ाई में न लगता हो वै चन्द्र यन्त्र धारण करके परीक्षा अथवा प्रतियोगिता में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं !
यह शरद पूर्णिमा सभी प्रकार के ऋण-रोग और दारिद्र्य से मुक्ति दिलाने वाली है ! पं. जय गोविन्द शास्त्री 

नवंबर माह में ढाई दिन जरा बचके

चंद्रमा और सूर्य के राशि परिवर्तन का मानव जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देता है | सूर्य जहां 1दिन में 1अंश की यात्रा करते हुए एक माह में एक राशि का
विचरण करते हैं वही चंद्रमा ढाई दिन में ही एक राशि की यात्रा पूरी कर लेते हैं | चंद्रमा प्राणियों के मन, विचारों एवं भावनाओं के स्वामी हैं अतः इनकी यात्रा
के समय आपकी राशि से शुभ-अशुभ भाव में पड़ने वाले प्रभाव का सीधा असर आपके स्वभाव पर दिखाई देता है | इसीलिये कई बार आपका निर्णय लेना बिल्कुल
सही साबित होता है किंतु, कई बार आप अपने किए गए निर्णयों से पैदा हुए झंझावातों में ही उलझ जाते हैं क्योकिं इसका का सीधा संबंध आपके विचारों-निर्णयों
से है जिन पर चंद्रमा का प्रभाव है | माह के वै ढाई दिन कौन-कौन से रहेंगे, जब चंद्रमा का अशुभ प्रभाव आपकी राशि पर अधिक पड़ेगा | इसी का ज्योतिषीय
विश्लेषण करते हैं |
मेष राशि- माह का आरंभ तो मिलाजुला रहेगा किंतु मध्य से परिस्थितियां बेहतर होंगी मान सम्मान की वृद्धि तो होगी, षड्यंत्र का शिकार होने से बचें | निर्णय लेते
समय सावधानी बरतें माह की 26 एवं 27 तारीखें अशुभ | इसमें स्वास्थ्य का ध्यान रखें |
वृषभ राशि- मान सम्मान की वृद्धि होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे | किसी भी नए कार्य अथवा व्यापार का आरंभ करना चाहें तो वो बेहतरीन लाभदायक सिद्ध
होगा फिर भी माह की 1और 2तारीखों के साथ-साथ 28 एवं29 तारीख को भी सावधानी बरतें |
मिथुन राशि- कामयाबी की दृष्टि से माह बेहतरीन रहेगा, गुप्त शत्रुओं के कारण मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है | संतान संबंधी चिंता दूर होगी |
विद्यार्थी वर्ग प्रतियोगिता में सफलता के लिए और मेहनत करें | माह की 3 एवं4 तारीखें अशुभ |
कर्क राशि- माह का आरंभ कुछ मानसिक अशांति एवं तनाव से शुरू होगा | माता-पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें | यात्रा के समय सामान चोरी होने से बचाएं |
नौकरी में पदोन्नति एवं नए अनुबंध प्राप्ति के योग फिर भी माह की 6 और 7 तारीखें अशुभ |
सिंह राशि- अपने पराक्रम के बलपर आप विषम हालात को भी सामान्य कर लेंगे, अतः उर्जा शक्ति का भरपूर उपयोग करते हुए कार्य आरंभ करें सफलता की संभावना
सर्वाधिक है | माह के मध्य से थोड़ा सा सावधानी बरतने की जरूरत है फिर भी 8,9 एवं10 तारीखें अशुभ |
कन्या राशि- अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें नेत्र विकार से बचें, कोई भी कार्य जब तक पूरे ना हो जाए उसे सार्वजनिक न करें | कामयाबी की दृष्टि से माह बेहतरीन
रहेगा रुका हुआ धन मिल सकता है, विदेश यात्रा के योग, माह की11 एवं 12 तारीखें अशुभ |
तुला राशि- मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा रहेगी, शरीर में विटामिंस की कमी न होने दें स्वास्थ्य के प्रति चिंतनशील रहें | आर्थिक दृष्टि से माह बेहतरीन रहेगा मकान
अथवा वाहन के क्रय का योग, लाभ उठाएं फिर भी माह की 13 और 14 तारीखें अशुभ |
वृश्चिक राशि- अधिक भागदौड़ और अपव्यय से आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है किंतु, माह के तीसरे सप्ताह से सुधार आएगा | कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारियों
से मधुर संबंध बनाकर रखें, निर्णय लेने में शीघ्रता दिखाएं | माह की 15, 16 तारीखें अशुभ |
धनु राशि- आपके लिए माह बेहतरीन लाभदायक सिद्ध होगा, शत्रु परास्त होंगे कोर्ट कचहरी के मामलों में सफलता मिलेगी, आय के साधन बढेंगें | महंगी वस्तु का क्रय कर
सकते हैं फिर भी 18 और 19 तारीखें अशुभ | इन दिनों कोई भी निर्णय जल्दबाजी में करें |
मकर राशि- माह में कार्य विस्तार भी होगा और रोजगार में नए अनुबंध प्राप्ति के योग भी बनेंगे | चुनाव संबंधी कोई भी कार्य करना चाह रहेहों तो परिस्थितियां आपके
पक्ष में रहेंगी लाभ उठाएं | इनसब के होते हुए भी माह की 20 और 21 तारीखें अशुभ |
कुंभ राशि- नौकरी में उन्नति एवं यात्रा देशाटन का लाभ मिलेगा | धार्मिक कार्यों पर खर्च होगा किंतु आकस्मिक कार्य बाधा भी आ सकती है इसलिए किसी भी तरह
का निर्णय जल्दबाजी में न करें यह बेहतर रहेगा माह की 22, 23 तारीखों को सावधानी बरतें |
मीन राशि- साहस एवं धैर्य से ही सारे कार्य निपटाने होंगे दांपत्य जीवन में कटुता आ सकती है | व्यापार उतार-चढ़ाव अधिक किंतु, माह के तीसरे सप्ताह से सुधार
की संभावना है | कोर्ट कचहरी के मामले बाहर ही निपटायें तो बेहतर | माह की 24 एवं 25तारीखें अशुभ |

बृहस्पति का धनु राशि में प्रवेश बनाया 'हंस' योग'- पं जयगोविन्द शास्त्री 
देवगुरु बृहस्पति लगभग 12वर्षों बाद पुनः 05 नवंबर की प्रातः 05 बजकर 17 मिनट पर अपनी राशि धनु में प्रवेश कर रहे हैं | ये एक सदी में लगभग आठ बार 
धनु राशि की परिक्रमा करते हैं | गुरु के धनु राशि में गोचर करने से 'हंस' योग बनता है | धनु और मीन राशि के स्वामी गुरु पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद 
नक्षत्रों के भी स्वामी हैं | कर्क राशि इनकी उच्च और मकर राशि नीच संज्ञक कही गयी है | जिन जातकों की जन्मकुंडली में गुरु धनु राशि में होकर केन्द्र या त्रिकोण 
में होंगें उनके लिए 'हंस' योग श्रेष्ठतम फलदाई रहेगा | वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को सर्वाधिक शुभ एवं शीघ्रफलदाई ग्रह माना गया है | शुक्ल यजुर्वेद में तो इन्हें 
आत्मा की शक्ति कहा गया है, जो प्राणियों को आत्मबोध की ज्योति प्राप्त कराकर अज्ञान के अन्धकार को दूर करते हुए जीव को सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित 
करते हैं | वेदों में भी कहा गया है कि, 'बृहस्पतिः प्रथमं जायमानो महो ज्योतिषः परमे व्योम् | सप्तास्यस्तु विजातो रवेणविसप्तरश्मिः धमत्तमांसि | 
अर्थात- बृहस्पति जो सबसे महान हैं अपनी स्थिति से आकाश के उच्चतमस्तर से सभी दिशाओं से, सातों किरणों से, अपनी ध्वनि से हमें आच्छादन करने वाले अन्धकार 
को पूर्णतया दूर करते हैं | ये सुंदर, पीतवर्ण, बृहद शरीर, भूरेकेश वाले अपने याचकों और आराधकों को वांछित फल प्रदान करने वाले देवता है | विवाह कराना, संतान प्राप्ति, 

मांगलिक कार्य, तीर्थ यात्राओं, स्कूल कालेज खोलने, प्रबंधन, लेखन अध्यापन, कथा वाचन, वेदाध्ययन, आद्ध्यात्मिक कार्यों एवं शिक्षा सम्बन्धी अनेकों कार्यों में इनका 
विशेष योगदान और आशीर्वाद रहता है | अगर ये आपकी कुंडली में अकारक हों, या वक्री अथवा किसी भी तरह से दोषयुक्त हों तो इनकी शान्ति करना अति उत्तम रहता 
है | सृजन में प्रजापिता ब्रह्मा का सहयोगी होने के फलस्वरूप इन्हें 'जीव' भी कहा गया है | जन्मकुंडली में द्वितीय, पंचम, नवम तथा एकादश भाव के कारक होते हैं | 
इनका धनु राशि में जाना सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा इसका ज्योतिशीय विश्लेषण करते हैं |

मेष राशि- आपके भाग्यभाव में बृहस्पति का गोचर किसी वरदान से कम नहीं है | भाग्य वृद्धि, विदेश यात्रा के योग, तीर्थ यात्रा और देशाटन का आनंद मिलेगा | 
इनकी अमृतदृष्टि आपके शरीर, शिक्षा एवं ज्ञान पर पड़ रही है अतः स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, शिक्षा प्रतियोगिता में सफलता एवं संतान के दायित्व की पूर्ति होगी | 
पराक्रम भाव पर पड़ रही इनकी मारक दृष्टि कुछ आलसी बना सकती है अतः इससे बचें |
वृषभ राशि- आपके अष्टमभाव में बृहस्पति का जाना स्वास्थ्य के लिए थोड़ा प्रतिकूल तो हो सकता है किंतु, मान सम्मान की दृष्टि से उत्तम रहेगा | इनकी दृष्टि 
व्ययभाव पर भी पड़ रही है अतः खर्च अधिक होगा | धन भाव पर भी इनकी दृष्टि के फलस्वरूप रुका हुआ धन आएगा | अचल संपत्ति का क्रय कर सकते हैं |
सुख भाव पर अमृत दृष्टि मकान वाहन के क्रय का योग बना रही है शीघ्र लाभ उठाएं |
मिथुन राशि- मिथुन राशि के लिए सप्तम भाव में बृहस्पति का हंस योग बनाना भी वरदान की तरह है | शादी-विवाह संबंधी वार्ता भी सफल रहेगी, व्यापार के क्षेत्र 
में उन्नति के एवं नौकरी में पदोन्नति के अवसर आयेंगे | यदि आप सरकारी सर्विस हेतु आवेदन करना चाहें तो शुभ रहेगा लाभ उठा सकते हैं | स्वास्थ्य भी अच्छा 
रहेगा, लाभ मार्ग प्रसस्थ होगा, सभी सोची-समझी रणनीति कारगर सिद्ध होगी |
कर्क राशि- कर्क राशि वालों के लिए शत्रु भाव में बृहस्पति का होना मिलाजुला फल देगा | स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, कर्ज से मुक्ति मिलेगी किंतु, गुप्त शत्रु बढ़ सकते 
हैं इसका ध्यान रखें | कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारियों से मधुर संबंध बनाकर रखें | इनकी अमृत दृष्टि आपके कर्मभाव पर है अतः नौकरी में पदोन्नति अथवा नए 
अनुबंध की प्राप्ति के योग बनेंगे | धन भाव पर दृष्टि पारिवारिक माहौल सौहार्दपूर्ण रखेगी |
सिंह राशि- आपके मूलत्रिकोण में बृहस्पति का जाना भी वरदान की तरह ही है | आपकी बड़ी परेशानियां एवं स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आएगी, शिक्षा के क्षेत्र में 
अभूतपूर्व सफलता मिलेगी | किसी भी प्रतियोगिता में बैठना चाहें तो अवसर अच्छा है लाभ उठायें | भाग्य भाव पर अमृत दृष्टि भाग्यवृद्धि एवं विदेश यात्रा के योग 
बनाएगी, तीर्थयात्रा का भी आनंद लेंगे लग्न पर भी दृष्टि स्वास्थ्य के लिए अनुकूल है |
कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए चतुर्थभाव में बृहस्पति का जाना मकान वाहन के क्रय का योग तो बनाएगा ही साथ ही समाज में मान-प्रतिष्ठा की भी वृद्धि 
होगी | गुरु की आयुभाव पर दृष्टि स्वास्थ्य के लिए अच्छी रहेगी | कर्मभाव पर दृष्टि कार्यक्षेत्र में उन्नति के दरवाजे खोल देगी, अतः अपनी ऊर्जा शक्ति का भरपूर 
उपयोग करते हुए कार्य में लगे रहेगें तो कामयाबिओं के चरम तक पहुंचेंगे |
तुला राशि- आपके पराक्रम भाव में बृहस्पति का जाना और भाग्यभाव पर मारक दृष्टि डालना थोड़ा सा कार्य में रुकावट के साथ धीरे धीरे सफल बनाएगा | नौकरी में 
पदोन्नति अथवा नए अनुबंध की प्राप्ति भी होगी किन्तु धोड़ा बिलम्ब से | किंतु व्यापार पर दृष्टि से  उत्तम रहेगा | दांपत्य जीवन में मधुरता, और शादी विवाह के 
योग बनेंगे | आयभाव में इनकी की अमृत दृष्टि लाभ के मार्ग प्रशस्त करेगी |
वृश्चिक राशि- आपके धनभाव में बृहस्पति का अपनी ही राशि धनु में आना आकस्मिक धन प्राप्ति के योग तो बनाएगा ही साथ ही किसी महंगी वस्तु का क्रय 
भी कराएगा | इनकी शत्रु भाव, एवं आयु भाव दृष्टि स्वास्थ्य के लिए थोड़ा सा प्रतिकूल हो सकती है इसका ध्यान रखें | कर्मभाव पर अमृतदृष्टि से कार्यक्षेत्र के 
विस्तार के लिए बेहतर है आय के साधन बढ़ेंगे, गया हुआ धन वापस आने के संकेत |
धनु राशि- बृहस्पति का अपनी ही राशि में आकर 'हंस' योग का निर्माण करना अति शुभ रहेगा | कार्यक्षेत्र का विस्तार तो होगा ही अधिकार भी बढ़ेगा | नौकरी में 
पदोन्नति एवं सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी | संतान संबंधी चिंता से भी मुक्ति मिलेगी, शिक्षा में लाभ, विवाह के योग एवं भाग्य वृद्धि की दृष्टि से यह योग 
अति उत्तम है | देशाटन का आनंद भी लेंगे और मांगलिक कार्यों को संपन्न करायेंगे |
मकर राशि- आपके लिए वृहस्पति का व्यय भाव में जाना मिलाजुला फल देगा, जहां एक ओर आप अधिक खर्च से परेशान रहेंगे वहीं दूसरी ओर बड़े सामाजिक 
कार्यों को करके यश भी प्राप्त करेंगे | गुरु का व्यय भाव में स्वग्रही होना आने वाली परेशानियों से मुक्ति के द्वार भी खोलेगा, अतः आपको संयम बनाए रखना 
है | चतुर्थभाव पर अमृतदृष्टि से मकान वाहन के क्रय का योग बनेगा, मानसिक सुख मिलेगा |
कुंभ राशि- आपके लाभभाव में गुरु का जाना कई मायनों में बेहतरीन रहेगा किंतु, ध्यान रखें यदि ईमानदारी से कमाया गया धन नहीं रहेगा तो वही धन दोगुना 
होकर वापस चला जाएगा अतः नेक नियति का विशेष ध्यान रखें | विद्यार्थी वर्ग के लिए पंचमभाव पर दृष्टि शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर रहेगी पढ़ाई में आलस्य 
न करें | सप्तम भाव पर अमृत दृष्टि दांपत्य जीवन में मधुरता कार्य व्यापार में उन्नति के योग बनाएगी |
मीन राशि- आपके कर्मभाव में गुरु का जाना अत्यंत शुभ फलदाई योग बनाएगा, जिसके फलस्वरूप कार्य व्यापार में उन्नति के मार्ग खुलेंगे | उच्चाधिकारियों से 
मधुर संबंध बनेंगे | धनभाव पर बृहस्पति की अमृतदृष्टि आर्थिक तंगी तो दूर करेगी ही किसी महंगी वस्तु का क्रय भी कर सकते हैं | चतुर्थभाव पर मारकदृष्टि 
कुछ मानसिक परेशानी बढ़ा सकती है, माता पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें, गुप्त शत्रुओं से बचें |

बृहस्पति को अधिक प्रसन्न करने उपाय- गुरुवार का व्रत करें, पीले वस्त्र धारण करें, गौओं की सेवा करें, झूँठ कम से कम बोलें, आम, पीपल, अनार का 
वृक्ष लगाएं | प्रतिदिन ॐ बृं बृहस्पतये नमः मन्त्र का 108 बार जप करें |
जाने-माने ज्योतिषविद् पं. जयगोविंद शास्त्री बीते तीन दशक से ज्यादा समय से वैदिक ज्योतिष, योग, ध्यान एवं देव अनुष्ठान आदि के माध्यम से लोगों के कल्याण कार्य में जुटे हुए हैं। पं. जयगोविंद शास्त्री की प्राथमिक शिक्षा-दीक्षा सुल्तानपुर से हुई। जबकि इन्होंने वेदाध्ययन-योग की विशेष पढ़ाई मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित महर्षि वेदविज्ञान विद्यापीठ से और शिक्षा शास्त्री उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थितमहर्षि वैदिक विश्वप्रशासनपीठ से किया। 

अपनी ज्योतिषीय भविष्यवाणी के लिए विख्यात पं. जयगोविंद शास्त्री सन् 1988 से देश के तमाम नामी-गिरामी समाचार पत्र, पत्रिकाओं और वेबसाइट्स के लिए लिखते रहे हैं। जिनमें 'ढाई दिन ज़रा बचके, सितारों के सितारे, ये सात दिन, आदि तमाम ज्योतिषीय कॉलम काफी प्रसिद्ध रहे। पं. जयगोविंद मीडिया के तमाम माध्यमों से वार्षिक राशिफल, ग्रह एवं गोचर से संबंधित लेख, ज्योतिष से जुड़े सवाल-जवाब आदि का कार्य विशेष रूप से करते रहे हैं। 

बीते कई सालों से पं. जयगोविंद न सिर्फ प्रिंट मीडिया के जरिए बल्कि इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से भी लोगों तक ज्योतिष का ज्ञान पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने देश के तमाम प्रतिष्ठित टीवी चैनल्स पर लाइव प्रसारण के माध्यम से प्रतिदिन दैनिक राशिफल, स्टॉक मार्केट का ज्योतिषीय विश्लेषण करके लोगों को सही दिशा दिखाने का कार्य किया है। उनके द्वारा अर्थ जगत से जुड़ी की गई तमाम सटीक भविष्यवाणी और विश्लेषण को देखते हुए उन्हें 'स्टॉक गुरु' की उपाधि से नवाजा गया। पं. जयगोविंद शास्त्री आकाशवाणी के तमाम रेडियो चैनल पर समय-समय पर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विषयों एवं खगोलीय घटनाओं पर परिचर्चा में शामिल होते रहते हैं। 

पं. जयगोविंद शास्त्री ने देश-विदेश के तमाम राजनेताओं, उद्योगपतियों, हॉलीवुड एवं बॉलीवुड की तमाम अभिनेत्री एवं अभिनेताओं आदि की जन्मकुंडलियों का सटीक विश्लेष्ण किया है। पं. जयगोविंद ने देश की जिन तमाम बड़ी शख्सियतों की कुंडलियों पर विशेष शोध किया है, उनमें भैरो सिंह शेखावत, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मायावती, सोनिया गांधी, मेनका गांधी, शरद पवार, पी. चिदंबरम, लालू यादव, मुलायम सिंह यादव, कल्याण सिंह, विद्याचरण शुक्ल आदि शामिल हैं। जबकि विदेशी राजनेताओं में जार्ज बुश, जानकेरी, बिल क्लिंटन, कोफ़ी अन्नान, यासर अराफात, मिखाइल गोर्वाच्योख, परवेज मुशर्रफ का पूर्ण ज्योतिषीय विश्लेषण किया है। 

पं. जयगोविंद ने फिल्मी सितारों के सितारों को लेकर भी सटीक भविष्यवाणी की है। जिनमें स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर, दिलीप कुमार, देवानंद, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, जीतेन्द्र, शत्रुघ्न सिन्हा, यश चोपड़ा, सुभाष घई, महेश भट्ट, मकबूल फ़िदा हुसैन, मुज़फ्फर अली, ओ.पी. नैयर से लेकर सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान जैसे अभिनेता तो वहीं हेमा मालिनी, सायरा बानो, रेखा, शबाना आज़मी, श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, जया बच्चन जैसी जानी-मानी अभिनेत्रियां शामिल हैं।  

पं. जयगोविंद ने हॉलीवुड के तमाम बड़े सितारों और खिलाड़ियों की कुंडली से जुड़े सितारों को देखकर सटीक विश्लेषण किया है। इनमें माइकल जैक्सन, हैली वेरी, जॉन लेनन, शेरोन स्टोन, आंद्रे अगासी, एलिजा बेथ टेलर, डेविड कैसिडी, पीटर हुक, फैट्स डोमिनो, टोनी ड़ेंजा, जेनिफर लोपेज, रॉब थामस, गैरी ओवेन्स, रेनी जेलवेगर, डेविड बायर्न, ली मेजर्स, स्मोकी राबिन्सन, जार्ज ल्युकास, टोनी हाक, केमरून डियाज, समेत कई बड़ी हस्तियां शामिल हैं। 

पं. जयगोविंद शास्त्री का क्रिकेट जगत से गहरा लगाव रहा है, इसलिए उन्होंने भारतीय क्रिकेट से जुड़े तमाम नामचीन खिलाड़ियों की जन्म कुंडलियों पर गहन शोध करते हुए उनका सटीक विश्लेषण किया है। क्रिकेट जगत से जुड़े जिन खिलाड़ियों का उन्होंने सटीक ज्योतिषीय विश्लेषण किया है, उनमें विजय अमृत राज, सुनील गावस्कर, कपिलदेव, मोहिंदर अमरनाथ, रविशास्त्री, दिलीप वेंगसरकर, कृष्णाचारी श्रीकांत, जवागल श्रीनाथ, किरण मोरे, सचिन तेंदुलकर, मोम्मद अजहरुद्दीन, सौरभ गांगुली, वी. वी. एस. लक्षमण, अनिल कुम्बले, वीरेंद्र सहवाग, महेंद्र सिंह धोनी, ब्रायन लारा, जेशन गिलेस्पी, माइकल जार्डन, डेविड वैकहम, जिम कुरिएर, शेन वार्न, स्टीव वा, नासिर हुसैन, एंडी फ्लावर, इयान बिशप आदि शामिल हैं।

पं. जयगोविंद शास्त्री ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बड़ी भविष्यवाणियां की हैं, जो अक्षरश: सत्य साबित हुईं। उनके द्वारा की गई तमाम बहुचर्चित भविष्यवाणियों में से कुछ इस प्रकार हैं 

1. राजनेता अटल विहारी बाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के संबंध में। 
2. सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के संबंध में। 
3. जनतादल के बिखरने और कभी एक सूत्र में नहीं बंधने के संबंध में। 
4. ए.पी.जे कलाम का भारत के राष्ट्रपति पद के लिए चयन के संबंध में। 
5. नरेंद्र मोदी की चुनावी जीत और गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के संबंध में। 
6. जार्ज बुश और लादेन की लड़ाई में बुश की हार और उन्हें कुछ नहीं हासिल होने के संबंध में। 
7. अजित जोगी की चुनावी हार के संबंध में 
8. राजस्थान में वसुंधरा राजे की हार और अशोक गहलौत की जीत के संबंध में। 
9. साध्वी उमा भारती का मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री बनने के संबंध में। 
10. शीला दीक्षित की चुनावी जीत और मदनलाल खुराना की हार के संबंध में। 
11. प्रणव मुखर्जी का भारत के राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के संबंध में।
12. नरेंद्र मोदी का भारत के प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के संबंध में। 
13. आशाराम बापू के जेल जाने के संबंध में। 
14. केजरीवाल द्वारा मुख्यमंत्री पर से स्तीफा देने के संबंध में। 
15. लालकृष्ण अडवानी के दोबारा प्रधानमंत्री न बनने के संबंध में।   

पुरस्कार एवं सम्मान 
धर्म, योग एवं ज्योतिष विधा के क्षेत्र में पं. जयगोविंद शास्त्री को कई बड़े सम्मान से नवाजा जा चुका है। देश—विदेश में उन्हें मिले जिन सम्मानों को भुलाया नहीं जा सकता, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं — 
   1.अप्रैल 2004 सिंहस्थ - उज्जैन में ज्योतिष विधा के लिए सम्मान।    
   2. 12 मई 2004 को प्रधानमंत्री, भारत सरकार द्वारा सम्मानित। 
   3. 11 अप्रैल 2007 को दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित द्वारा सम्मानित। 
   4. 11 जून 2011 को पोर्ट लुईस, मॉरीशस में ज्योतिष गुरु सम्मान। 
   5. 11 मई 2013 को मिसीसागा में कनाडा सरकार द्वारा सम्मान। 
   6. अंतररष्ट्रीय ज्योतिष कुंभ सम्मलेन में फलित वेत्ता की उपाधि।